Raj Thackeray
नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र में होने जा रहे आगामी निकाय चुनावों को लेकर सियासत तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार सत्ताधारी दल और चुनाव आयोग को घेरे हुए है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने इस पूरे मामले को लेकर एक बार फिर बीजेपी और चुनाव आयोग पर करारा हमला बोला है। राज ठाकरे ने साफ कहा है कि जब तक मतदाता सूची पूरी तरह से ठीक नहीं होती, तब तक चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए।
दिवाली से एक दिन पहले रविवार, (19 अक्टूबर) को गोरेगांव (पूर्व) स्थित नेस्को सेंटर हॉल में पार्टी की एक विशाल सभा में मनसे कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा राज ठाकरे ने कहा कि यह सभा स्थानीय निकाय चुनाव और वोटर लिस्ट (मतदार यादी) में गड़बड़ियों को लेकर की जा रही है। इस दौरान उन्होंने कहा कि आपको याद होगा 2016-17 में मैंने इन वोटिंग मशीनों और सूचियों के खिलाफ आवाज उठाई थी। उस समय एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, लेकिन उन्हें मेरी बात की गंभीरता समझ नहीं आई, लेकिन जब सबने उनके दरवाजे खटखटाने शुरू किए, तो उन्हें समझ आ गया।
उन्होंने कहा कि आज भी देखिए 232 विधानसभा चुनाव में जीतकर आए फिर सब सब शांत थे। कोई उत्साह नहीं, वोट देने वाले और चुनकर आने वाले दोनों हैरान थे। कैसे जीत मिल रही है..सब कहते है? राज ठाकरे की सभा में लोग आते हैं..लेकिन भीड़ नहीं आ रही, ऐसा होगा तो लोग कैसे आएंगे। हर शहर में वोटर भर दिए है, ऐसे चुनाव होगा देश में तो किसलिए चुनाव हो रहे है? अगर ऐसे चुनाव हो रहा है तो मतदारों का अपमान है, आप वोट दें या ना दें मैच फिक्सिंग हुआ है।
96 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े गए!
राज ठाकरे ने जोर देकर कहा कि स्थानीय दलों को खत्म करने की साजिश चल रही है। मेरे पास पक्की जानकारी है कि करीब 96 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े गए हैं। हर शहर में बाहरी लोगों को घुसाया गया है। अगर यही सब पहले तय है, जो चुनाव करवाने का क्या मतलब? यह सब मैच फिक्सिंग जैसा लग रहा है। मनसे नेता ने कहा कि अगर मतदाता सूची में ही आपके सारे हिसाब-किताब तय हैं, तो हमारे विधायक और सांसद कैसे चुने जा सकते हैं?
ऐसा होगा तो फिर चुनाव क्यों लड़े जाएं?
राज ठाकरे ने कहा कि यह एक लोकतांत्रिक साजिश है और इससे मतदाता व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा, अगर मतदाता सूचियां पहले से सेट कर दी गई हैं, तो लोगों के वोट देने या न देने से क्या फर्क पड़ेगा? अगर मतदाताओं को इस तरह कतारों में खड़ा किया जाता है, तो यह महाराष्ट्र के मतदाताओं का अपमान और देश का अपमान है। हमारे देश में ऐसे चुनाव तो होंगे तो फिर चुनाव क्यों लड़े जाएं?
चुनाव आयोग से पूछने पर सत्ताधारी दल हो रहे नाराज
राज ठाकरे ने आगे कहा कि हम चुनाव अधिकारियों से कह रहे हैं कि इन सूचियों को ठीक किया जाए। इतना पूछने पर सत्ताधारी दल नाराज हो रहे हैं। आखिर वे नाराज क्यों हो रहे हैं? क्या कहीं ये जरूरी है? उन्होंने गोबर खाया है। ये लोग जो आज सत्ता में हैं, विपक्ष में रहते हुए भी यही कहते थे।
ठाकरे ने कहा कि ये किस प्रकार का लोकतंत्र है? बाद में कहते हैं, इनका एक भी विधायक और सांसद चुनकर नहीं आया। अरे रिजल्ट तो पहले से तय है।हम चुनाव आयोग से कह रहे है, कि वोटर लिस्ट ठीक करो तो सरकार के लोग क्यों बोल रहे हैं। सभी को पता है, यह सरकार कैसे आई। यही लोग जब विरोध में थे, आज मैं जो बोल रहा हूं यही बात वे लोग बोलते थे।
मेरी सभी से विनती है, की सर्तक रहिए! इसलिए आपको बुलाया है। मेरे लोग आपके पास आएंगे तो उनकी मदद करें। एक-एक घर में आठ लोग भरे जा रहे है।जब तक इस मामले पर कोई हल नहीं निकलता तब तक महाराष्ट्र में चुनाव होना ही नहीं चाहिए, पहले वोटर लिस्ट साफ करिए।
राज ठाकरे ने कहा, मैं डेवलपमेंट के बीच में नहीं आता, लेकिन मराठी आदमी को परेशानी होगी तो सहन नहीं होगा। ये सब नए रास्ते उद्योगपतियों के लिए बना रहे हैं। हमारे ही मराठी लोग उन्हें दलाल बनकर जमीन दे रहे हैं। ये सब पहले से प्लान किया गया है। गुजरात को मुंबई चाहिए थी। ठाकरे ने कहा ये भी कहा, मुंबई महाराष्ट्र को ना मिले यह बात पहले सरदार वल्लभभाई पटेल थे, आचार्य अत्रे की बुक पढ़िए आपको समझ में आएगा विश्वास नहीं होगा।
भाजपा हर तरह से कब्जा चाहती है
मनसे प्रमुख ठाकरे ने कहा कि कहा कि सत्तारूढ़ दल के विधायक खुद कहते हैं, मैंने अपने क्षेत्र के 20 हजार विधानसभा क्षेत्रों में विलास भुमरे का चारा पहुंचाया है। सत्तारूढ़ दल का एक विधायक आपकी नाक के नीचे बोल रहा है। वह मंच पर महाराष्ट्र के मतदाताओं का अपमान कर रहा है। केंद्र और राज्य में सरकार सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा इस तरह का कार्य कर रही है। अब ये महाराष्ट्र पर कब्जा करना चाहते हैं। ये अडानी और अंबानी के लिए काम करते हैं।

यह सिर्फ दिखावा है और राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है: एकनाथ शिंदे
रविवार, (19 अक्टूबर) को शिवसेना प्रमुख और राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ठाकरे बंधुओं की अनौपचारिक मुलाकात को ‘नाटक’ करार दिया। शिंदे ने इसे रिश्तों में सुधार के रूप में प्रचारित किए जाने पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि यह केवल दिखावा है और राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
शिंदे ने अंबरनाथ में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अतीत में मराठी नाटक ”भाऊबंधकी” बहुत प्रसिद्ध था, लेकिन अब ‘मनोमिलन’ का जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है। भाऊबंधकी का तात्पर्य भाइयों या रिश्तेदारों के बीच की प्रतिद्वंद्विता से है, जबकि मनोमिलन का अर्थ दिल और दिमाग का मिलन होता है। हालांकि, यहां दिखाई दे रहा मनोमिलन केवल बाहरी दिखावे के लिए है।
निकाय चुनावों के लिए गठबंधन बनाने की अटकलें तेज
एकनाथ शिंदे की यह टिप्पणी शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा मुंबई में आयोजित दिवाली समारोह में शामिल होने के बाद आई है। दोनों भाइयों की हाल ही में हुई कई मुलाकातों ने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए गठबंधन बनाने की अटकलों को भी तेज कर दिया था।

नए आनंद दिघे नाटक प्रेक्षागृह का किया उद्घाटन
शिंदे ने नए आनंद दिघे नाटक प्रेक्षागृह का उद्घाटन अपने दिवंगत गुरु और शिवसेना के दिग्गज नेता आनंद दिघे को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेतृत्व वाली ‘महायुति’ सरकार की विभिन्न उपलब्धियों को भी गिनाया। शिंदे ने कहा कि राज्य में किए जा रहे विकास कार्य और सरकार की नीतियां जनता के हित में हैं और राजनीतिक चालबाजी से प्रभावित नहीं होती है।
शिवसेना का उद्देश्य केवल राज्य के विकास पर केंद्रित
शिंदे ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना का उद्देश्य केवल जनहित और राज्य के विकास पर केंद्रित है। उन्होंने नेताओं के बीच दिखावटी मेल-जोल को लेकर जनता को सचेत रहने की अपील की।
इस तरह, ठाकरे बंधुओं की हालिया मुलाकात पर शिंदे ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह केवल राजनीतिक नाटक है। उन्होंने जनता से अपेक्षा की कि वह किसी भी प्रकार की मीडिया या राजनीतिक प्रचार के बहकावे में न आए और राज्य के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान दें।
