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अंकेश जायसवाल/वाराणसी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की पहल से भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए काशी नगरी में ‘शास्त्र संग्रहालय एवं अनुसंधान केंद्र’ का भव्य शुभारंभ महाराष्ट्र सरकार के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों किया गया।
इस केंद्र का उद्देश्य भारत की प्राचीन ग्रंथ संपदा का संरक्षण, डिजिटलीकरण और आधुनिक तकनीक की सहायता से समाज तक उसका प्रसार करना है।
कार्यक्रम का आयोजन धर्मसंघ सभागार, श्री स्वामी करपात्री जी महाराज आश्रम, श्री धर्मसंघ मठ मंदिर, दुर्गाकुंड, वाराणसी में आयोजित किया गया था। इस भव्य शुभारंभ में देशभर से विद्वान, संन्यासी, शोधकर्ता और संस्कृत प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

अपने सम्बोधन में मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बाबा विश्वनाथ और मां गंगा को नमन करते हुए कहा कि इस पावन नगरी में आने का अवसर मिलना किसी सौभाग्य से कम नहीं। इस कार्यक्रम के जरिये खुद को प्राचीन ज्ञान परंपरा से जुड़ा महसूस करता हूं। इसके जरिये युवाओं को अपने प्राचीन ग्रंथों की जानकारी प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने आगे कहा कि धर्म संघ का यह संस्थान सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता का प्रतीक है। यह सनातन संस्कृति और जीवन शैली का प्रतीक है। पीएम मोदी की दूरदर्शिता के पहलू को स्पष्ट करते हुए शिंदे ने कहा कि पीएम मोदी ने हमें विकास और विरासत का संदेश दिया है। पुरातन ग्रंथों को डिजिटाइज करने के कार्य के लिए प्रोत्साहित करने का कार्य पीएम मोदी की योजना का ही प्रमाण है।
शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा कि हमारा देश शस्त्र और शास्त्र संपदा के साथ विश्व गुरु बनने की दिशा में पुनः अग्रसर होगा। इसके लिए सरकार और समाज को कंधे से कंधा मिलाकर चलना है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना से ओतप्रोत सनातन हिन्दू सिर्फ एक धर्म नहीं सर्व समावेशी समाज का निर्माण का आधार है।

इस मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार के आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि शास्त्र के लिए संग्रहालय का शुभारंभ आने वाले दिनों में लोगों को अपने ग्रंथों के प्रति आकर्षित करने का काम करेगा।
शास्त्र संग्रहालय एवं अनुसंधान केंद्र के अध्यक्ष भुजंग बोबडे ने धन्यवाद ज्ञापन में कहा कि काशी ज्ञान आचमन का प्रमुख केंद्र है। यहां से पुरातन ग्रंथों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का केंद्र खुलना अपने आप मे काफी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के अंत में एकनाथ शिंदे ने सभागार में प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में कई प्राचीन ग्रंथों और पुस्तकों का समावेश रहा, जिसमें मुख्यतः विज्ञान भैरवकल्प- शारदा लिपि, शिवपूजाविधि एवं अन्य, बिजक (त्रिधा) सटीक, ऋग्वेद संहिता सर्ग 1 से 8, ऋग्वेद संहिता सर्ग 2 से 8, सामवेद संहिता – सर्ग 1 व 2, ऐतरेय ब्राम्हणक- 1 से 8, केनोपनिषद, हनुमत संहिता, पंचिका 1 से 5, गोमूत्र प्रयोग, आर्यभट्टीय, मांधता संवाद ग्रंथ, विवेक मार्तण्ड (गोरक्षशत), वशिष्ठ स्मृति, तर्क प्रकाश, तंत्रसार कर्मप्रकाश, (तर्कभाषा) तात्पर्य टीका, शारंगधर संहिता सहित कई पुस्तकें देखने को मिलीं।
