नेटवर्क महानगर/मुंबई
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने देश की सबसे धनी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की है और अब मनपा में महापौर बनाने को तैयारी में जुट गई है। महायुति की बीएमसी में मिली जीत को बड़ी जीत माना जा रहा है। क्योंकि लगातार 25 वर्षों तक ठाकरे परिवार और उनकी पार्टी ‘शिवसेना’ का कोई सदस्य ही मुंबई की बीएमसी में महापौर बना था। इस परंपरा को पहली बार भाजपा ने तोड़ने का काम किया है। लेकिन भाजपा और शिंदे की शिवसेना ने बीएमसी में जीत तो हासिल कर ली है लेकिन मेयर कौन बनेगा इसे लेकर पेंच फंस फंसा हुआ है।
बीएमसी की 227 सीटों में से भाजपा-शिवसेना ने मिलकर कुल 117 सीटें जीत ली हैं, जो कि बहुमत से तीन सीट ज्यादा है। बीएमसी चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसने 89 वार्डों में जीत हासिल की है। लेकिन तब भी उसके सामने ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिसमें भाजपा शिंदे की शिवसेना के समर्थन के बिना महापौर बना सके और महानगरपालिका पर शासन कर सके। ऐसे में समीकरण के तौर पर शिंदे की शिवसेना को किंगमेकर के रूप में देखा जा सकता है।
शिंदे गुट की चाहत- मेयर हमारा होना चाहिए!
शिंदे गुट के प्रवक्ताओं और अन्य नेताओं ने भी संकेत दिया है कि मुंबई का महापौर शिवसेना (शिंदे गुट) से होना चाहिए क्योंकि यह बालासाहेब ठाकरे की विरासत है। शिंदे की शिवसेना ने अविभाजित शिवसेना में रहते हुए बीएमसी में लंबे शासन को देखा है। शिंदे, जिन्होंने भाजपा की 132 विधानसभा सीटों के मुकाबले 57 सीटें जीतकर 2024 में भाजपा से मुख्यमंत्री की कुर्सी छीनने की असफल कोशिश की थी, इस बार अधिक सतर्क नजर आ रही है। पार्टी ने अपने सभी जीते हुए नगरसेवकों को फाइव स्टार होटल ताज लैंड्स में शिफ्ट कर दिया है।
वहीं, पार्टी नेताओं का कहना है कि नगरसेवक, विधायक और कुछ बड़े नेताओं के साथ उपमुख्यमंत्री शिंदे होटल ताज में महानगरपालिका और आने वाले जिला परिषद चुनाव पर चर्चा करेंगे। सभी नगरसेवकों को लंबे समय तक होटल में नहीं रुकाया जाएगा।
वहीं, आज मुख्यमंत्री फडणवीस ने फिर से दोहराया और कहा कि एकनाथ शिंदे से बातचीत कर सब तय करेंगे, मेयर महायुति का ही होगा। वहीं, बीजेपी नेता राहुल नार्वेकर ने कहा है कि मुंबई बीएमसी में मेयर बीजेपी का ही होगा। मुंबई की जनता ने जनादेश ही ऐसा दिया है, बीजेपी की सबसे ज़्यादा सीटें चुनकर आई है तो मेयर बीजेपी का होगा।
ऐसे में अगर एकनाथ शिंदे आसानी से भाजपा को महापौर का पद सौंप देते हैं, तो इससे उनके पार्टी कार्यकर्ताओं को गलत संदेश जा सकता है। इसलिए, कम से कम उपमहापौर के पद, स्थायी समिति की अध्यक्षता और महत्वपूर्ण वार्डों को लेकर पर्दे के पीछे गहन बातचीत होना लगभग तय है।
बीजेपी और शिंदे की शिवसेना को कितनी सीटें मिलीं?
15 जनवरी 2026 को हुए बीएमसी चुनाव में ठाकरे परिवार के गढ़ में सेंध लगाते हुए बीजेपी 89 सीटें जीतने में कामयाब रही। वहीं शिंदे की शिवसेना को 29 सीटों पर जीत हासिल हुई। दोनों मिलाकर ये आंकड़ा 118 पहुंच गया, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है। बीएमसी पर सत्ता पाने के लिए 114 सीटें जरुरी है।
महापौर ‘महायुति’ का ही होगा: फडणवीस
वहीं, बीएमसी चुनाव में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के बाद मेयर पद को लेकर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मेयर पद को लेकर कोई विवाद नहीं है। महापौर ‘महायुति’ का ही होगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से जब सवाल किया गया कि ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर बात चल रही है क्या? तो उन्होंने कहा कि हम एकनाथ शिंदे जी के साथ बैठकर मेयर पर बात करेंगे।
मुंबई के महापौर पर क्या बोले शिंदे?
एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को ठाणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये महापौर को लेकर कहा कि महापौर पद से ज्यादा ज़रूरी है कि मुंबई वैसी दिखे जैसी उसे होना चाहिए, उसी के लिए काम करेंगे। महायुति का ही महापौर होगा। मुंबईकरों के जनादेश को हमने स्वीकार किया है। यह बड़ी सफलता है। जनमत के फैसले को हम मानते हैं। मुंबईकरों ने शिवसेना-बीजेपी महायुति को सफलता दी है।
शिंदे ने आगे कहा कि केंद्र में पीएम मोदी जी और महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस जी हमारे नेता हैं और उनके साथ हम हैं। महाराष्ट्र की सभी जनता को बहुत धन्यवाद, हम जनता के आभारी हैं। सभी मुंबईकरों को बहुत धन्यवाद। महायुति की सरकार मुंबई और महाराष्ट्र की जनता के लिए प्रतिबद्ध है। शिवसेना-बीजेपी ने टीम के साथ मिलकर साथ-साथ चुनाव लड़ा है और हम मुंबई को बदलेंगे।
मुंबई में शिवसेना ने भी अच्छी बढ़त बनाई:शिंदे
शिंदे ने कहा, मुंबईकरों, ठाणेकरों और शहर के सभी मतदाताओं का धन्यवाद और आभार। ठाणे में 71 सीटों पर जीत मिली, 75 तक पहुंचेंगे। ठाणेकरों ने स्पष्ट बहुमत दिया है। मुंबई में भी शिवसेना और बीजेपी बहुमत के करीब पहुंची हैं। महापालिका में महायुति का ही महापौर बैठेगा। माहौल पूरी तरह महायुति के पक्ष में है। मुंबई में शिवसेना ने भी अच्छी बढ़त बनाई है। शिवसेना-बीजेपी का ही महापौर बनेगा। यह चुनाव विकास के एजेंडे पर लड़ा गया। कुछ लोगों ने भावनात्मक मुद्दों पर चुनाव लड़ा।
25 वर्षों तक सत्ता भोगने वालों को जनता ने नकारा: शिंदे
उन्होंने ये भी कहा, साढ़े तीन वर्षों में मुंबईकरों के लिए किए गए कामों और कई परियोजनाओं को गति दी। 25 वर्षों तक सत्ता भोगने वालों को जनता ने नकार दिया। कई मुद्दे भावनात्मक बनाए गए। यह परफॉर्मेंस-आधारित जनादेश है। जनता ने विकास को ही ब्रांड के रूप में स्वीकार किया है। मुंबई का तेज़ी से विकास होना चाहिए। इसके लिए ट्रिपल-इंजन सरकार है। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। मुंबई को अंतरराष्ट्रीय दर्जे का शहर बनना चाहिए, ऐसा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है। मोदी जी कहते हैं कि 5 ट्रिलियन इकोनॉमी में मुंबई का बड़ा योगदान है।
जहां अलग-अलग लड़े, वहां भी साथ रहेंगे: शिंदे
एकनाथ शिंदे ने कहा, मुंबई की जनता जैसा चाहती है, वैसा करने का काम किया है। पूरी मुंबई को गड्ढामुक्त किया जाएगा। एसटीपी प्लांट नहीं थे, अब हम बना रहे हैं। मेट्रो को गति दी. जो परियोजनाएं रुकी थीं, उन्हें फिर से शुरू किया। वाटर टैक्सी के नए प्रयोग किए जा रहे हैं। रिंग रोड बनाया जा रहा है। ठाणे-बोरीवली टनल से यातायात जाम से लोगों को राहत मिल रही है। राज्य में हम साथ हैं। जहां अलग-अलग लड़े, वहां भी साथ रहेंगे।
हमारा एजेंडा स्पष्ट है: शिंदे
मुंबई में ठाकरे के साथ गठबंधन पर उन्होंने कहा कि हमारा एजेंडा स्पष्ट है। शिवसेना-बीजेपी की युति आज की नहीं है, हमारी विचारधारा समान है और उसमें कोई समझौता नहीं। हिंदुत्व हमारी विचारधारा है, लेकिन चुनाव में उसका इस्तेमाल नहीं किया। राज्य में बीजेपी नंबर एक पार्टी है और हम नंबर दो हैं। हम चांदा से बांदा तक गए हैं। ठाकरे के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, उनका भविष्य बताने के लिए मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं। हम काम करते रहेंगे। भावनात्मक मुद्दे और मराठी कार्ड खेलकर चुनाव नहीं जीते जा सकते।
