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द्रौपदी मुर्मू बनीं देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति, तीसरे राउंड में ही यशवंत सिन्हा को बड़े अंतर से दी शिकस्त! पीएम मोदी ने दी बधाई

नयी दिल्ली: राष्ट्रपति पद की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने चुनाव जीत लिया है। इस जीत के साथ ही उन्होंने भारतीय राजनीति के इतिहास में पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के तौर पर अपना नाम दर्ज करवा लिया है। मुर्मू की जीत पर देश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में केंद्र सरकार की ओर से जश्न का इंतजाम किया गया है। मुर्मू की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें बधाई देने के लिए उनके घर पहुंचे और उन्हें जीत की शुभकामना दी है! वहीं उनके साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी नए राष्ट्रपति को बधाई देने पहुंचे हैं।


बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव के वोटों की गिनती अभी तक तीन चरणों में की गई थी। इन तीनों चरणों में ही एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने अपने प्रतिद्वंदी यशवंत सिन्हा पर दोगुने से भी ज्यादा अंतर की बढ़त बनाए रखी। अब तक हुई गिनती में कुल वोट 3219 थे। जिनकी वैल्यू 8,38,839 थी। इसमें से द्रौपदी मुर्मू को 2161 वोट जिनकी वैल्यू 5,77,777 मिले हैं। वहीं विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को 1058 वोट मिले जिनकी वैल्यू 2,61,062 है। हालांकि, अभी एक राउंड की काउटिंग बाकी है, लेकिन वो महज औपचारिकता ही है। क्योंकि द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति बनने के लिए जरूरी 50 फीसदी वोट पा लिए हैं।

राष्ट्रपति पद के लिए कुल 748 सांसदों के वोट पड़े हैं जिनमें से मुर्मू को 540 वोट मिले हैं जबकि यशवंत सिन्हा को महज 208 वोट मिले हैं। इस दौरान 15 सांसदों के वोट अमान्य हो गये हैं।
द्रौपदी मुर्मू की जीत को लेकर आश्वस्त भाजपा ने उनकी जीत के बाद दिल्ली पार्टी मुख्यालय से राजपथ तक रोड शो की योजना बनाई है। सूत्रों ने बताया कि इस मौके पर कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे।

बताते चलें कि राष्ट्रपति चुनाव में सबसे अधिक वोट पाने वाला विजेता नहीं बल्कि एक निश्चित कोटे से अधिक वोट पाने वाला होता हैं। प्रत्येक उम्मीदवार के लिए डाले गए वोटों को जोड़कर, दो से विभाजित करके और उसमें ‘1’ जोड़कर कोटा निर्धारित किया जाता है। इस वैल्यू से अधिक वोट पाने वाले उम्मीदवार की जीत होती है। राष्ट्रपति चुनाव में मनोनीत सांसदों को छोड़कर संसद के दोनों सदन (लोकसभा व राज्य सभा) के सदस्य और सभी राज्यों की विधानसभा के सदस्य मतदान करते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति चुनाव में 776 सांसद और 4,033 निर्वाचित विधायक सहित कुल 4,809 मतदाता राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने के पात्र थे।

24 जुलाई को राष्ट्रपति कोविंद का कार्यकाल होगा समाप्त
देश के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद 25 जुलाई को नई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शपथ लेंगी।

दिल्ली भाजपा ने द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर अभिनंदन यात्रा निकाली
दिल्ली भाजपा ने द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर अभिनंदन यात्रा निकाली…

जानिए- राष्ट्रपति की सैलरी और मिलने वाली सुविधाओं के बारे में…
भारतीय संविधान के मुताबिक, राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च पद होता है। उन्हें देश का प्रथम नागरिक भी कहा जाता है। राष्ट्रपति तीनों सेना के सर्वोच्च कमांडर होते हैं। उनकी मंजूरी के बिना कोई कानून पास नहीं होता है। सुप्रीम कोर्ट के बाद भी राष्ट्रपति को ही किसी भी मामले में क्षमादान देने का अधिकार होता है। भारत के राष्ट्रपति को प्रति माह 5 लाख रुपए का वेतन मिलता है।

2017 में बढ़कर 5 लाख रुपए हुई सैलरी
गौरतलब हो कि 2017 तक राष्ट्रपति का मासिक वेतन 1.50 लाख रुपए था। जो कई वरिष्ठ नौकरशाहों के वेतन से भी कम था। ऐसे में 2017 में राष्ट्रपति के वेतन को बढ़ाकर पांच लाख रुपए प्रति महीने किया गया। राष्ट्रपति का वेतन 1951 के राष्ट्रपति की उपलब्धि और पेंशन अधिनियम से निर्धारित होता है। मासिक वेतन के अलावा राष्ट्रपति को कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं।

राष्ट्रपति भवन पर हर साल 2.25 करोड़ का खर्च!
राष्ट्रपति की सैलरी के इतर उनको मिलने वाले अन्य भत्तों में मुफ्त चिकित्सा, आवास और उपचार सुविधा (जीवन भर) शामिल हैं। इसके अलावा भारत सरकार हर साल उनके अन्य खर्चों जैसे आवास, स्टाफ, खाने-पीने और अतिथियों की मेजबानी पर करीब 2.25 करोड़ रुपए खर्च करती है। इसके अलावा राष्ट्रपति के रहने के लिए दिल्ली के पॉश इलाकों में आलीशान राष्ट्रपति भवन बनाया गया है।

रिटायरमेंट के बाद भी मिलती हैं ये सब सुविधाएं!
राष्ट्रपति पद से रिटायरमेंट के बाद भारत के राष्ट्रपति को कई लाभ मिलते हैं।इनमें 1.5 लाख प्रति माह पेंशन, सुसज्जित बंगला, मुफ्त ट्रेन या हवाई यात्रा जैसी सुविधाएं शामिल हैं। राष्ट्रपति को मिलने वाली 5 लाख की सैलरी पर एक खास बात यह भी है कि इस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। इसके अलावा राष्ट्रपति की जीवनसाथी को हर महीने 30,000 रुपए सेक्रटेरियल असिस्टेंस के तौर पर मिलता है।

17 साल में बनकर तैयार हुआ था राष्ट्रपति भवन!
राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन 320 एकड़ में फैला है। इसमें 340 कमरे है। अग्रेजों की हुकूमत में इसे ब्रिटिश वायसराय के लिए बनाया गया था। 17 सालों के निर्माणकाल के बाद यह 1929 में बनकर तैयार हुआ था। राष्ट्रपति भवन में इमारत के साथ-साथ मुगल गार्डन भी है। जिसमें घुमने की चाहत दिल्ली पहुंचने वाले हर सैलानी की होती है। राष्ट्रपति भवन में उद्यान, खुली जगह, अंगरक्षक और कर्मचारियों के आवास, अस्तबल के आलावा अन्य कार्यालय भी है।