नेटवर्क महानगर/मुंबई
महाराष्ट्र मंत्रालय से एक बड़ा ही हैरान कर देने वाला मामला प्रकाश में आया है। मंत्रालय से समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले के जीवन और कार्य पर बनने वाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म की सरकारी फाइल रहस्यमय तरीके से गायब हो गई है। मामला गंभीर होने पर मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशक (DGIPR) के वरिष्ठ सहायक निदेशक सागर नमदेव कांबले ने ये शिकायत दर्ज करवाई है।
कैसे सामने आया मामला?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 28 अक्टूबर को नियमित जांच के दौरान पता चला कि डॉक्यूमेंट्री से जुड़ी मूल फाइल की जगह सिर्फ उसकी फोटोकॉपी मौजूद है। कांबले ने बताया है कि जब विभाग में पूछताछ की गई तो सहकर्मियों ने बताया कि वे लंबे समय से इसी फोटोकॉपी के आधार पर काम कर रहे थे और उसी में अपडेट जोड़ते आ रहे थे। पूरा रिकॉर्ड खंगालने के बाद भी मूल फाइल नहीं मिली।
फाइलों का रिकॉर्ड भी गायब!
इस घटना को लेकर हुई जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ कि 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2020 तक की फाइलों का रिकॉर्ड भी गायब है। वरिष्ठ लिपिक अश्विनी गोसावी ने यह जानकारी विभागीय स्तर पर साझा की। इसके बाद डीजीआईपीआर ने 14 नवंबर को आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने के निर्देश दिए।
सरकारी कामकाजों पर उठ रहे गंभीर सवाल?
इस मामले में पुलिस अब इस बात का पता लगाने में जुटी हुई है कि मंत्रालय से इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज कैसे और कब गायब हो गए? इस पूरी घटना ने मंत्रालय की दस्तावेज सुरक्षा-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महात्मा ज्योतिबा फुले पर आधारित डॉक्यूमेंट्री सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और समाज सुधार जैसे विषयों से संबंधित हैं। ऐसे में फाइल का गायब होना विभाग के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
कहा और कैसे गायब हुई फाइल? जांच कर रही पुलिस
बता दें कि सागर नामदेव कांबले 1 सितंबर से मिनिस्ट्री में पोस्टेड हैं। दर्ज शिकायत के मुताबिक, 28 अक्टूबर को एक फाइल चेक करते समय उन्हें पता चला कि ज्योतिबा महात्मा फुले पर एक डॉक्यूमेंट्री के प्रपोज़ल से जुड़ी ओरिजिनल फाइल की जगह सिर्फ एक फोटोकॉपी रखी हुई थी। जब कांबले ने अपने सहयोगियों से ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स के बारे में पूछा, तो उन्हें बताया गया कि वे फोटोकॉपी से काम कर रहे हैं और नई जानकारी जोड़ रहे हैं। सीनियर अधिकारियों के कहने पर, ओरिजिनल फाइल को पूरे ऑफिस में ढूंढा गया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, सीनियर क्लर्क अश्विनी गोसावी ने बताया कि 1 जनवरी, 2017 से 31 मार्च, 2020 तक की पूरी रिकॉर्ड फाइल गायब है। 14 नवंबर को, DGIPR ने कांबले को ऑफिशियल कंप्लेंट फाइल करने का ऑर्डर दिया। फिर उन्होंने मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में कंप्लेंट फाइल की, जहां FIR दर्ज की गई, जिसमें अनजान लोगों पर संवेदनशील दस्तावेज़ को नुकसान पहुंचाने या गलत जगह रखने का आरोप लगाया गया।
सबसे बड़े क्रांतिकारियों में से एक हैं फुले
महात्मा ज्योतिबा फुले सिर्फ एक विचारक नहीं थे बल्कि वह अपने दौर के उन सबसे बड़े क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने जातिगत भेदभाव, छुआछूत और महिलाओं के खिलाफ असमानता जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। फुले ने अपने जीवन को महिलाओं, वंचितों और शोषित किसानों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया था। फुले की सोच केवल समाज सुधार तक सीमित नहीं थी। वे दूरदर्शी कृषि विशेषज्ञ और मानवतावादी विचारक भी थे।
