मुंबई में लॉकडाउन की उड़ी धज्जियां, टूटा हजारों प्रवासी मजदूरों के सब्र का बांध!

मुंबई: कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लॉकडाउन बेहद कारगर हथियार साबित हो रहा है, लेकिन इससे देशभर में फंसे मजदूरों की बेचैनी भी बढ़ रही है। 15 अप्रैल को लॉकडाउन खत्म होने की उम्मीद लगाए मजदूरों के सब्र का बांध तब टूट गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह लॉकडाउन की मियाद 3 मई तक बढ़ाने की घोषणा कर दी। यही वजह है कि शाम होते-होते मुंबई के बांद्रा में हजारों की संख्या में मजदूर इकट्ठा होकर सड़क पर उतर कर आंदोलन करने लगे।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने दावा किया कि ये सभी मजदूर अपने-अपने घर लौटने की जिद पर अड़े हैं। मंत्री के मुताबिक, लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा से मजदूरों का सब्र टूट गया और वो परेशानी बढ़ने की आशंका में घर लौटने की जिद करने लगे। ये सभी प्रवासी मजदूर हैं जिनका कहना है कि अब वो यहां नहीं रूक सकते। दिल्ली के बाद मुंबई पुलिस भी अफवाहों को रोकने में नाकाम रही जिसका उदाहरण बांद्रा रेलवे स्टेशन है। इनके बीच ऐसी अफवाह उड़ी कि वो घर पहुंच सकते हैं और वो सब रेलवे स्टेशन के पास जाकर एकजुट हो गए।

गौरतलब है कि भारत में सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस महाराष्ट्र से ही आ रहे हैं। ऐसे वक्त में मुंबई में ऐसी भीड़ वहां के सरकार और प्रशासन की नाकामी है। घोषणा के बाद महाराष्ट्र सरकार या फिर प्रशासन उन मजदूरों को आश्वासन नहीं दे पाई जिसकी वजह से हजारों की तादाद में प्रवासी मजदूर वहां एकजुट हो गए। मौके पर राज्य के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी ने पहुँच कर मोर्चा संभाला। चिंता की बात यह है कि महाराष्ट्र कोरोना संक्रमित मरीजों के मामले में देश में नंबर वन है। मुंबई कोविड-19 मरीजों का हॉटस्पॉट है। ऐसे में इतनी भीड़ का उमड़ना सोशल डिस्टेंसिंग पर सवाल खड़ा करते हुए बहुत घातक साबित हो सकता है।
