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Corona Vaccine: Sputnik-V की कीमतों का हुआ ऐलान- जानिए एक डोज के लिए कितने चुकाने होंगे दाम

नयी दिल्ली: कोरोना संकट के बीच रूस में तैयार की गई कोरोना वैक्सीन ‘Sputnik-V’ शुक्रवार को भारत में भी लॉन्च कर दी गई। मिली जानकारी के मुताबिक, हैदराबाद में एक व्यक्ति को ‘Sputnik-V’ वैक्सीन की पहली डोज दी गई है। रूस की कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक वी (Sputnik-V) भारतीय बाजारों में उपलब्ध होने से पहले ही वैक्सीन की कीमत (Sputnik V Price) का खुलासा हो गया है। भारत में इस वैक्सीन की मार्केटिंग करने वाली कंपनी डॉ. रेड्डी के अनुसार, ‘स्पूतनिक वी’ की एक डोज के लिए करीब एक हजार रुपए खर्च करना होंगे।
भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में ‘कोविशील्ड’ और ‘कोवैक्सीन’ के बाद अब एक और वैक्सीन स्पूतनिक-V भी अगले सप्ताह से बाजारों में उपलब्ध होगी।
इस वैक्सीन की कीमतों को लेकर भी शुक्रवार को खुलासा हो गया है। रूस से आई स्पूतनिक-V वैक्सीन की एक खुराक की कीमत 948 रुपए रखी गई है। हालांकि, इसमें 5 फीसदी GST जोड़ने के बाद इसकी कीमत 995.40 रुपए होगी।

फिलहाल 1.5 लाख डोज उपलब्ध
डॉ. रेड्डी ने एक बयान जारी कर इसकी जानकरी दी है। बयान में कहा गया है कि जब स्पूतनिक-V वैक्सीन का निर्माण भारत में शुरू होगा, तब उसकी कीमत कम होगी। भारत में फिलहाल स्पूतनिक-V वैक्सीन की 1.50 लाख डोज उपलब्ध हैं।

दो डोज के लिए दो हजार होगा खर्च
अगर आप प्राइवेट में स्पूतनिक वैक्सीन लगवाते हैं तो आपको दो डोज के लिए करीब 2,000 रुपए (एडमिनिस्‍ट्रेशन चार्ज अलग से) खर्च करने होंगे।

देश में लग चुकी Sputnik-V की पहली डोज
भारत में ‘स्‍पूनिक-वी’ की पहली डोज लग चुकी है। डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज में कस्‍टम फार्मा सविर्सिज के ग्‍लोबल हेड दीपक सापरा को हैदराबाद में वैक्‍सीन की पहली डोज दी गई है। उन्‍हें 21 दिन बाद वैक्‍सीन की दूसरी डोज दी जाएगी।
बता दें कि भारत में अब तक दो टीकों (कोविशील्ड और कोवैक्सीन) के साथ टीकारण अभियान तेजी से चल रहा है। केंद्र सरकार इन दोनों टीकों को 250 रुपए में खरीदती है। हालांकि, कोविशील्ड और कोवैक्सीन ने प्राइवेट अस्पतालों और खुले बाजार के लिए अपनी वैक्सीन की अलग कीमत रखी है। और कई राज्यों में इसकी किल्लत भी देखी जा रही है। अब स्पूतनिक-V वैक्सीन से लोगों को राहत मिल सकेगी।

1 मई से निजी अस्पतालों को भी मंजूरी
केंद्र सरकार ने 1 मई से वैक्सीन कंपनियों को राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों को भी टीके की बिक्री की अनुमति दे दी है। देश में टीके का उत्पादन कर रहीं कंपनियां 50 फीसदी टीका केंद्र सरकार को देंगी तो 50 फीसदी टीका राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों को बेच सकती हैं।

1 मई को ही भारत पहुंच गई थी पहली खेप
गौरतलब है कि Sputnik-V वैक्सीन की पहली खेप भारत में 1 मई को ही पहुंच गई थी, लेकिन अभी तक इस वैक्सीन को लगाने का काम शुरू नहीं किया गया था। दरअसल, डॉ रेड्डीज कंपनी ने बताया कि इस टीके को 13 मई को सेंट्रल ड्रग्स रेगुलेटरी, कसौली से मंजूरी मिल गई है। इसके बाद इसे लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। कंपनी के मुताबिक, अभी Sputnik V वैक्सीन की और खेप आयात की जा रही है, आगे इसे भारतीय साझेदार कंपनियों के द्वारा ही उत्पादित किया जाएगा।
कंपनी ने बताया कि फिलहाल वैक्सीन के दाम ज्यादा है, लेकिन भविष्य में जब भारत में ही Sputnik-V वैक्सीन का निर्माण होने लगेगा, तब इसकी कीमत में गिरावट हो सकती है। कंपनी भारत में छह टीका बनाने वाली कंपनियों से इसके उत्पादन के लिए बात कर रही है।
गौरतलब है कि हाल ही में नीति आयोग के एक सदस्य ने भी दावा किया था कि इस साल दिसंबर तक भारत में कोविड-19 वैक्सीन के 200 करोड़ से ज्यादा के डोज उपलब्ध हो सकते हैं।

कौन-सी वैक्सीन है बेहतर?
यदि आप वैक्सीन नहीं लगवाने की सोच रहे हैं तो आप अपनी सेहत के साथ मजाक कर रहे हैं। देश के तमाम डॉक्टर्स और एक्सपर्ट के मुताबिक तीनों ही वैक्सीन कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचाने और मौत को टालने में 100 फीसदी प्रभावी हैं। ऐसे में आपके लिए जरूरी यही है कि आपको इनमें से जो वैक्सीन मिले उसे लगवा लें। आपकी सेहत और कीमती जीवन के लिए वैक्सीन जरूरी है।

कोविशील्ड
कोविशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका ने तैयार किया है और अब इसे पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बना रही है। कोविशील्ड दुनिया की सबसे लोकप्रिय वैक्सीन में से है और कई देश इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। कोविशील्ड म्यूटेंट स्ट्रेन्स के खिलाफ सबसे असरदार और प्रभावी है। कोवीशील्ड एक वायरल वेक्टर टाइप की वैक्सीन है।
कोविशील्ड को सिंगल वायरस के जरिए बनाया गया है जो कि चिम्पैंजी में पाए जाने वाले एडेनोवायरस ChAD0x1 है। कोवीशील्ड को भी WHO ने मंजूरी दी है। कोविशील्ड का ट्रायल पिछले साल नवंबर में खत्म हुआ था। इसकी प्रभाविकता या इफेक्टिवनेस रेट 70 फीसदी है। यह वैक्सीन कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचाती है और संक्रमित व्यक्ति जल्दी ठीक होता है।

कोवैक्सिन
कोवैक्सिन को ICMR और भारत बायोटेक ने तैयार किया है। इसे पारंपरिक इनएक्टिवेटेड प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है। इनएक्टिवेटेड का मतलब है कि इसमें डेड वायरस को शरीर में डाला जाता है, जिससे एंटीबॉडी पैदा होती है और फिर यही एंटीबॉडी वायरस को मारती है। यह वैक्सीन लोगों को संक्रमित करने में सक्षम नहीं है, बल्कि यह प्रतिरक्षा तंत्र को असली वायरस को पहचानने के लिए तैयार करता है और संक्रमण होने पर उससे लड़ता है और उसे खत्म करने की कोशिश करता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस वैक्सीन से कोरोना वायरस को खतरा है, इंसानों को नहीं। कोवैक्सीन की प्रभाविकता 78 फीसदी है। एक शोध में यह दावा किया गया है कि यह वैक्सीन घातक संक्रमण और मृत्यु दर के जोखिम को 100 फीसदी तक कम कर सकती है। हाल ही में हुए शोध में यह दावा किया गया है कि कोवैक्सिन कोरोना के सभी वेरिएंट्स के खिलाफ कारगर है।

स्पुतनिक-वी
स्पुतनिक V भी एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है, लेकिन इसमें और कोवीशील्ड में बड़ा फर्क यही है कि कोवीशील्ड को एक वायरस से बनाया गया है, जबकि इसमें दो वायरस हैं और इसके दोनों डोज अलग-अलग होते हैं। स्पुतनिक V को भारत का सबसे प्रभावी वैक्सीन माना गया है। इस पैमाने पर भारत की सबसे इफेक्टिव वैक्सीन है। स्पुतनिक V 91.6 फीसदी प्रभावी है। ऐसे में इसे सबसे अधिक प्रभावीइ वैक्सीन कहा जा सकता है। यह सर्दी, जुकाम और अन्य श्वसन रोग पैदा करने वाले एडेनोवायरस 26 (Ad26) और एडेनोवायरस 5 ( Ad5) पर आधारित है। यह कोरोना वायरस में पाए जाने वाले कटिदार प्रोटीन की नकल करती है, जो शरीर पर सबसे पहले हमला करता है। वैक्सीन शरीर में पहुंचते ही इम्यून सिस्टम सक्रिय हो जाता है और शरीर में एंटीबॉडी पैदा हो जाती है।